अभी ख़त्म नहीं होगा किसान आन्दोलन? अब क्या है किसानों की मांगे, तीनों कृषि कानून को लेकर

तीनो कृषि कानून क्या है: दोस्तों जैसा कि आप सब जानते हैं कि मोदी सरकार द्वारा सितम्बर माह 2020 में तीन कृषि सुधार कानून लाये गए थे। इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ काफी आन्दोलन हुआ। लेकिन अब किसान भाइयों के लिए एक खुसखबरी आ चुकी है, जी हाँ पीएम मोदी ने 19 नवम्बर 2021 को राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला ले लिया है, यानी किसान की 1 साल की मेहनत रंग लायी है।

आइये जानते हैं कि ये तीनों कृषि विधेयकों के नियम-कानून क्या-क्या हैं, और इनसे किसानों को क्या समस्या आ रही थी। हमने यहाँ नए कृषि कानूनों की Hindi PDF Download करने का लिंक भी उपलब्ध करवाया है, जिससे आप इसकी ऑफिसियल जानकारी भी देख सकें।

तीनो कृषि कानून क्या है? –

भारत में 22 सितम्बर 2020 को केंद्र सरकार की ओर से कृषि व्यवस्था से जुड़े तीन नए विधेयक लागू किये गए थे, इन विधेयकों को ही किसान बिल 2020 कहा जाता है।इन तीनों बड़े कृषि विधेयकों को अब राष्ट्रपति की सहमति के बाद, पूरे देश में लागू किया गया था। हालाँकि पीएम मोदी द्वारा इन कानूनों को इसी महीने यानी नवम्बर 2021 में वापस लेने का ऐलान किया गया है।

ताजा न्यूज़ –

किसान आंदोलन की अगवाई करने वाले राकेश टिकैत अभी किसान आंदोलन ख़त्म करने के मूड में नहीं दिख रहे। उनका मानना है कि पीएम मोदी अपना फैसला फिर बदल सकते हैं, इसलिए पहले कागज पर दिखाएँ कि कृषि कानून कानूनी तौर पर ख़त्म हुए हैं या नहीं। 

ये कृषि सुधार कानून कुछ इस प्रकार हैं –

  1. किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020 – कृषि बाजारों से सम्बंधित
  2. किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक – कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से सम्बंधित
  3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक – खाद्य पदार्थों के भण्डारण से सम्बंधित

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तीनो कृषि कानून क्या है? अब जाने डिटेल में –

दोस्तों आइये अब इन इन तीनों विधेयकों के बारे में विस्तार से जानते हैं –

1. कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य संवर्धन एवं सुविधा विधेयक 2020

किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020 का उद्देश्य विभिन्न राज्यों द्वारा गठित APMC द्वारा विनियमित अनाज मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री कर सकने की अनुमति देना है। केंद्र सरकार का कहना है कि अब किसान इस नए बिल के जरिये अब APMC मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को अच्छे दामों में बेच पाएंगे। जिससे वे निजी खरीदारों से बेहतर दाम भी प्राप्त कर पाएंगे।

लेकिन, आन्दोलन करने वाले किसानों का मानना है कि केंद्र सरकार ने इस कानून के जरिये अनाज मंडियों को एक सीमा में बांध दिया है। अब इस बिल के जरिये बड़े कार्पोरेट खरीदारों को खुली छूट दी गई है। वे बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी कानून के दायरे में आए हुए वे किसानों की उपज खरीद-बेच सकते हैं। हालाँकि वे किसानों से जोर जबरजस्ती नहीं कर सकते। पंजाब और हरियाणा के किसानों ने एक आन्दोलन के माध्यम से आवाज उठाई है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म कर सकती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है।

2. किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक

किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक का उद्देश्य अनुबंध खेती यानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को और अधिक सहज और विश्वसनीय बनाना है। अब आप अपनी जमीन को एक निश्चित धनराशि पर एक पूंजीपति या ठेकेदार को किराये पर दे सकते है। जिससे निश्चित अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट लेने वाला कुछ भी उपज ले सकता है। और उसे कहीं भी बेच सकता है।

3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक –

यह कृषि कानून अनाज, दालों, आलू, प्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को विनियमित करता है। इस विधेयक के अनुसार अब सरकारी भण्डारण के लिए आवश्यक खाद्य वस्तु की सूची से इन खाद्यों को बाहर करने का प्रावधान है। यानी अब सरकार युद्ध व प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों को छोड़कर, अन्य उपयोग के लिए अनाज भण्डारण नहीं रखेगी। यानी अब कोई भी अपने पास कितना भी भण्डारण रख सकता है।

किसान बिल के फायदे क्या होते –

मोदी सरकार के अनुसार नए कृषि कानूनों से खेती-किसानी में ये लाभ होंगे –

  • किसान अपनी फसल को देश के किसी भी राज्य में बेंच सकता है।
  • अनाज मंडियों के साथ साथ किसानों को प्राइवेट खरीदारों को अपनी फसलें बेचने का अधिकार दिया गया है।
  • कंपनियों और किसानों के बीच फसल उत्पादन करने का पूर्व निर्धारित मूल्य तय किया जा सकता है।
  • नए कृषि विधेयकों से किसानों में अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के अनुसार प्रतियोगी खेती करने का उत्साह आएगा।
  • राज्य के बाहर उत्पादन की खरीद-बिक्री का टैक्स निजी कम्पनियाँ या व्यापारी भरेंगे, किसान नहीं।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य से जादा कीमतों में किसानों का उत्पादन बिक सकेगा।
  • किसानों में बेहतर कृषि करने के प्रति लगाव बढेगा। जिससे किसानों के साथ साथ देश का विकास बढेगा।

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क्या है तीनों कृषि कानून के नुकसान –

किसान संगठनों का मानना है कि –

  • नए कृषि कानूनों से से मंडी व्यवस्था ख़त्म हो जाएगी।
  • प्राइवेट कम्पनियाँ मनमानी करेंगी।
  • अम्बानी और अडानी को ही फायदा होगा, किसानों को नहीं।
  • फसलों की और भी बेकार कीमत मिलेगी।
  • छोटे किसानों का शोषण होगा।

New Kisan Bill 2020 in Hindi PDF Download

दोस्तों किसान आन्दोलन के बीच में इस कृषि बिल के बारे में जानना भी बहुत जरुरी है। इसलिए आपके लिए हमने kisan bill pdf download करने का लिंक दे रहें हैं। यहाँ से आप कृषि कानून 2020 के बारे में अधिक जान सकते हैं।

किसान बिल की हिंदी PDF खोलें

FAQ –

किसान बिल का विरोध क्यों?

केंद्र सरकार द्वारा लाये गए किसान बिलों का विरोध, किसानों की मांगों और 3 कृषि कानूनों को वापस लेने को लेकर है। जबकि मोदी सरकार कृषि कानूनों में सुधार करने को तैयार है, वापस लेने को नहीं।

कृषि विधेयक 2020 कब पास हुआ?

देश में खेती से जुड़े तीन नए किसान बिलों को 22 सितम्बर 2020 को पास किया गया था।

MSP का फुल फॉर्म क्या है?

MSP का Full Form, Minimum Support Price या न्यूनतम समर्थन मूल्य होता है। MSP के तहत किसानों का अनाज, सरकार द्वारा पूर्व निर्धारित उचित दामों में ख़रीदा जाता है।

 

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1 thought on “अभी ख़त्म नहीं होगा किसान आन्दोलन? अब क्या है किसानों की मांगे, तीनों कृषि कानून को लेकर”

  1. Jo bhi sarkar tex lagayegi bo ghoom gham ke antim upbhog kartao par padega jo ki kishan or majdoor hi h jisse majdooro or kishno k ghar bas ek time ka hi khana ban payega

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