पर्सनल लोन न चुकाने पर कितने साल की जेल होगी, जाने सरकारी नियम

अगर bank से पर्सनल लोन लेने के बाद, तय समय सीमा पर लोन की धनराशि नहीं वापस कर पाते हैं तो बैंक आपके खिलाफ क्या कदम उठा सकता है? ये बहुत से लोगों का सवाल होता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताने वाले हैं कि अगर आपने किसी बैंक या NBFC से लोन लिया है, और उसे चुका नहीं पा रहे हैं तो इस स्थिति में ये पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा? तो लोन न चुकाने से जुड़े नए नियमों की डिटेल जानने के लिए इस आर्टिकल में हमारे साथ बने रहिये –

पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा –

किसी भी बैंक या NBFC द्वारा निर्गत पर्सनल लोन को उपभोक्ता द्वारा न चुकाने पर निम्नलिखित एक्शन लिए जा सकते हैं –

पर्सनल लोन न चुकाने पर क्या होगा

  1. सबसे पहले लोन की EMI भरने पर लेट फीस व पेनालिटी लगायी जाती है।
  2. इसके साथ ही बैंक ईमेल व फोन कॉल करके लोन भरने में हो रही देरी का कारण जानने का प्रयास करता है।
  3. कुछ महीनों तक EMI या लोन वापसी न आने पर बैंक के Internal Recovery agent उपभोक्ता से संपर्क करेंगे
  4. अगर उनसे काम नहीं हुआ तो Thierd Party Recovery Agent को ये काम सौंपा जाएगा।
  5. ये करने के बाद भी अगर उपभोक्ता लोन वापसी नहीं करता तो कानूनी तौर पर बैंक, लीगल नोटिस भी जारी करता है।
  6. यदि 180 दिन के बाद भी लोन की धनराशि या EMI नहीं जमा की जाती है तो बैंक उपभोक्ता के अकाउंट को ब्लैक लिस्ट व डिफाल्टर घोषित कर देता है।
  7. इसके बाद कानूनी धारा 138 और Negotiable Instrument Act, 1881 के तहत FIR, बैंक द्वारा दर्ज करायी जा सकती है। जिसके तहत दोषी को 2 साल की जेल व पेनालिटी जमा करनी पड़ सकती है।

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पर्सनल लोन न चुकाने के आम कारण –

बैंक और कानून के सिकंजे में कोई आम इंसान नहीं फसना चाहता, लेकिन किसी समस्या की वजह से लोन न लौटा पाने की सम्भावना से कोई इन्कार नहीं कर सकता। साधारणतयः Loan Repayment न कर पाने के निम्न कारण हो सकते हैं –

  • नौकरी छूट गयी हो (Job Loss)
  • व्यापार में भारी नुकसान (Business Loss)
  • स्वास्थ्य से जुड़ी प्रॉब्लम (Medical Emergency)
  • पर्सनल लोन लेने वाले की मृत्यु (Borrower’s Death)

लोन न चुकाने वालों की प्रोफाइल पर हो सकते हैं ये IMPACT –

  1. EMI या Loan Repayment न कर पाने वालों का सिबिल स्कोर बेकार हो जाएगा
  2. उन्हें भविष्य में किसी भी बैंक या NBFC से लोन नहीं मिलेगा
  3. बैंक लोन न  चुकाने वालों को डिफाल्टर लिस्ट में डाल देता है।
  4. सभी बैंकों का विश्वास डिफाल्टर लिस्ट वालों पर जीरो हो जाता है।

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बैंक द्वारा लोन न चुकाने वालों खिलाफ लिए जा सकते हैं ये भी एक्शन –

यदि उपभोक्ता द्वारा लिए गए पर्सनल लोन का अमाउंट काफी जादा है, तो लीगल एक्शन के आलावा बैंक इन स्टेप्स को भी लोन वापसी के लिए अपना सकता है –

  • आर्बिट्रेशन क्लोज इन लोन अग्रीमेंट एक्ट के तहत, उपभोक्ता जिस कंपनी में काम करता है, वहां से उसकी 50% सैलरी हर महीने काटी जा सकती है।
  • अगर लोन अमाउंट 20 लाख से जादा है तो बैंक debt Recovery Tribunal (DRT) की सहायता ले सकता है। जिससे उपभोक्ता को काफी समस्याओं का सामना पड़ सकता है।
  • इसके आलावा लोन लेने वाले की सम्पति भी जप्त करवा सकती है, अगर लोन लेते समय प्रॉपर्टी डिटेल दी गयी होंगी।

सवाल जबाब (FAQ) –

अगर उपभोक्ता के पास पैसे हैं और वह जानबूझ कर लोन नहीं भर रहा है तो क्या होगा?

ऐसे उपभोक्ताओं से एक commity द्वारा अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। जिसके बाद उन्हें विलफुल डिफाल्टर लिस्ट में डाल दिया जा सकता है। और लीगल एक्शन का विकल्प हमेशा बैंक के पास होता है।

लोन वापसी से जुड़े मामलों में उपभोक्ता के पास क्या अधिकार होते हैं?

उपभोक्ता कोर्ट की मदद से अपनी बात रख सकते हैं। इसके आलावा लोन न चुकाने के सम्बन्ध में उपभोक्ता को मारा पीटा या मानसिक रूप से पीड़ित नहीं किया जा सकता।

Emi नहीं चुकाने पर क्या होता है?
लोन की EMI नहीं देने पर बैंक, लोन अमाउंट पर लेट फीस व पेनालिटी लगा सकता है। इसके आलावा ईमेल व फोन कॉल द्वारा उपभोक्ता से संपर्क किया जा सकता है।

 

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