क्या रेस्टोरेंट ले रहा है जबरन उपभोक्ता सेवा शुल्क? जाने सरकारी नियम कानून

क्या आपको पता है कि बड़े होटल या रेस्टोरेंट्स आपसे कितना सर्विस चार्ज लेते हैं? अगर नहीं तो इसका मतलब आप उपभोक्ता मामले विभाग के एक महत्वपूर्ण कानून के बारे में नहीं जानते। जी हाँ, इस कानून का नाम है उपभोक्ता सेवा शुल्क कानून, जिसमें ग्राहक की मर्जी के बगैर कोई भी रेस्टोरेंट या हॉस्टल जबरन सेवा शुल्क यानी सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता। आइये इस कानून की नयी अपडेट और विभाग द्वारा लिए नए फैसलों के बारे में थोड़ा विस्तार से बात करते हैं –

क्या है उपभोक्ता सेवा शुल्क –

किसी होटल या रेस्टोरेंट द्वारा ग्राहकों द्वारा ली गयी सेवा के बिल भुगतान के समय लगाये जाने वाले सर्विस चार्ज को ही उपभोक्ता सेवा शुल्क कहते हैं। उपभोक्ता मामले विभाग भारत सरकार की माने तो यह शुल्क ग्राहक की मर्जी के बगैर नहीं लगाया जा सकता।

उपभोक्ता सेवा शुल्क

दरअसल हम और आप में से लगभग हर किसी से कभी न कभी यह चार्ज लिया गया होगा, लेकिन चूँकि अधिकतर ग्राहक बिल में लगाये गए इस एक्स्ट्रा चार्ज को लीगल या अनिवार्य मानते हैं, जिससे रेस्टोरेंट मनमाने तरीके से उपभोक्ता सेवा शुल्क लेने लग रहे हैं।

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उपभोक्ता मामले विभाग ने रेस्‍टोरेंट्स को सेवा शुल्क के सम्बन्ध में क्या चेतावनी दी है?

आपको बतादें कि उपभोक्ता मामले विभाग ने 23 मई 2022 को रेस्टोरेंट्स द्वारा जबरन सेवा शुल्क लेने के सम्बन्ध में चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के उपभोक्ताओं द्वारा आयी हाल की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए 2 जून 2022 को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन की बुलाया गया है। जिसमें इस मुद्दे पर विचार विमर्श करके कोई नया अनाउंसमेंट जारी हो सकता है। 

उपभोक्ता मामले विभाग (डीओसीए) के द्वारा बुलाई गयी इस बैठक से विभाग में आई कई मीडिया रिपोर्टों के साथ-साथ राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) पर उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों का स्थाई समाधान निकलने की उम्मीद है।

उपभोक्ता सेवा शुल्क के सम्बन्ध में क्या है वर्तमान नियम –

प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो द्वारा प्रकाशित न्यूज़ में बताया गया है कि कोई भी भोजनालय या रेस्टोरेंट, गलत तरीके से जबरन सेवा शुल्क नहीं चार्ज कर सकते। चेकआउट बिल में बताये गए सुविधा शुल्क पर यदि ग्राहक राजी नहीं है तो इसे जोर जबरदस्ती करके नहीं वसूला जा सकता। ग्राहक यह अधिकार है कि वह अपने सहमती से ही बिल भुगतान में सर्विस चार्ज दे।

उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव श्री रोहित कुमार सिंह द्वारा नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में यह बताया गया है कि रेस्‍टोरेंट और भोजनालय गलत तरीके से ग्राहकों से सेवा शुल्क वसूल कर रहे हैं, हालांकि यह प्रभार स्वैच्छिक है और यह देना न देना उपभोक्ताओं के विवेक पर निर्भर करता है, लेकिन यह कानून के अनुसार आवश्‍यक नहीं है।

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क्यों सरकार को लेने पड़ रहे हैं नए फैसले –

उपभोक्‍ताओं से सेवा शुल्क जबरन वसूल किये जाने की तमाम शिकायतों व भोजनालयों द्वारा बहुत उंची दरों पर सर्विस शुल्क लेने के कारण विभाग को नए कदम लेने पड़ सकते हैं। कई उपभोक्ताओं ने तो ये भी रिपोर्ट किया है कि ऐसे प्रभारों की वैधता के बारे में झूठे तौर पर गुमराह भी किया जा रहा है।

ग्राहकों द्वारा बिल राशि से इस तरह के शुल्क को हटाने को हटाने के अनुरोध को देखते हुए उपभोक्ता मामले विभाग इसकी को बारीकी से और विस्तार से जाँच करवाने की आवश्यकता पड़ रही है।

Consumer Service Charge के बारे में क्या हैं चर्चा के विषय –

  1. सेवा शुल्क अनिवार्य करने वाले रेस्‍टोरेंट के खिलाफ एक्शन
  2. किसी अन्य शुल्क या प्रभार की आड़ में बिल में सेवा शुल्‍क जोड़ने पर कार्यवाही
  3. सेवा शुल्क स्वैच्छिक होने की जानकारी स्पष्ट करना
  4. सेवा शुल्क का भुगतान करने से विरोध करने पर उपभोक्ताओं को शर्मिंदा करने पर एक्शन

कोई रेस्टोरेंट अगर जबरन सेवा शुल्क लेने की कोसिस करता है तो क्या करें –

उपभोक्ता मामले विभाग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि अगर कोई भी रेस्टोरेंट या भोजनालय आपसे यह बताता है कि सेवा शुल्क देने अनिवार्य है तो आप विभाग की हेल्पलाइन व सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर शिकायत दे सकते हैं। अगर विभाग की जाँच में सम्बंधित रेस्टोरेंट दोषी पाया जाता है तो उसको अनुचित व्‍यापार व्‍यवहार की श्रेणी में करके कार्यवाही की जायेगी।

ऐसे ग्राहक जिनको सेवा शुल्क के संबध में कोई शिकायत या जानकारी चाहिए वे उपभोक्‍ता विवाद निवारण आयोग/उपयुक्त क्षेत्राधिकार वाले फोरम ncdrc.nic.in पर जा सकता है.

 

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